शाम के बाद सहर

एक बार अकबर ने बीरबल से कुछ ऐसा लिखने को कहा
जिसे खुशी में पढ़ो तो गम हो और गम में पढ़ो तो खुशी हो
तब बीरबल ने लिखाः- ‘‘ये वक्त भी गुजर जायेगा’’
पर जब हम मुश्किल में होते हैं तो लगता है की ये वक़्त कभी नहीं गुज़रने वाला …मुश्किल वक़्त बहुत धीरे बीतता है
पर अगर हम याद रखें की “ये वक़्त भी गुज़र जायेगा” तो शायद मुश्किल वक़्त बिताना आसान हो जाये 
ऐसे ही मुश्किल वक़्त में ये कविता लिखी थी ….

शाम के बाद सहर

सब बिखर सकता है,
और सकता है संवर भी !
ये ज़िंदगी क्या है ?
एक रास्ता और भंवर भी
रोऊँ तो कहाँ जाकर
किसके कंधे पे सर रखूं
मैं खुद जब हूँ,
मंज़िल और मुसाफिर भी सफर की !
चले चल ए ज़िन्दगी
लेती चल इम्तिहान,
मुझे पता है शाम के बाद
आती है सहर भी !!

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