एक अजीब सा डर

एक अजीब सा डर

एक अजीब सा डर हर वक्त घेरे रहता है,

कुछ खो देने का डर……….

‘जो लिया यहीं से लिया

जो दिया यहीं दिया

क्या लेकर आये थे क्या लेकर जाओगे’

बचपन में गीता का ये पाठ अच्छे से कण्ठस्थ किया था

फिर भी क्युं एक अनजान सा डर हर पल घेरे रखता है

कुछ खो देने का डर………

 

एक अजीब सी चिन्ता हर वक्त घेरे रहती है,

कुछ हो जाने की का चिन्ता……..

‘क्यों व्यर्थ चिन्ता करते हो

किससे व्यर्थ डरते हो

कौन तुम्हे मार सकता है

आत्मा न मरती है न पैदा होती है’

गीता का ये पाठ भी बचपन में अच्छे से कण्ठस्थ किया था

फिर भी क्युं एक अनजान सी चिन्ता हर पल घेरे रखती है

कुछ हो जाने की का चिन्ता……..

क्या डर और चिन्ता से मुक्ति पाने को

केवल पाठ कण्ठस्थ कर लेना काफी न था?

– रश्मि जिंदल

© Rashmi Jindal, www.RashmiJindal.com, 2016

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