अम्मी

चिन्तन,दर्शन,जीवन,सर्जन, रूह, नज़र पर छाई अम्मी

सारे घर का शोर-शराबा,सूनापन, तनहाई अम्मी

घर में झीने रिश्ते मैने कितनी बार उधड़ते देखे

चुपके-चुपके जाने कब कर देती तुरपाई अम्मी

बाबा जब गुज़रे सब चीज़ें तक़सीम हुई तब

मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से आई अम्मी॥

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